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थोड़ी मेहनत की, एक नया टेम्पलेट

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क्या हम कभी इतने 'सभ्य' नहीं रहे कि 'हाशिया' ही ना रहे...?

निकल आते हैं आंसू हंसते-हंसते,ये किस गम की कसक है हर खुशी में .