चैटिंग


अगल-बगल बंद केबिनों में  

दूर दोस्ती तलाशते लोग  

प्रति घंटे मात्र १० रुपये पर व्यस्त थे. 

नजदीकियों से नजदीकियां बढ़ाना  
महंगा बहुत हो गया है शायद.

#श्रीश पाठक प्रखर

टिप्पणियाँ

vivek ने कहा…
bahut sahi kaha aapne shreesh ji,aapki baat se sahamat hun.lekhan to kai baras se kar raha hun ddordarshan par bhi radio par bhi kayee rachnayen likhin par blog par naya hun aapko pad kar achha laga,mere blog par bhi sawagat www.rangdeergha.blogspot.com padiye aur apna mat zaroor bataiye...vivek

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